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आधूनिक हिंदी काव्य पाठ्यक्रम सेमिस्टर 1

    1 जो बीत गई सो बात गई – डॉ. हरिवंशराय बच्चन   जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अम्बर के आनन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे जो छूट गए फिर कहाँ मिले पर बोलो टूटे तारों पर कब अम्बर शोक मनाता है जो बीत गई सो बात गई             जीवन में वह था एक कुसुम थे उसपर नित्य निछावर तुम वह सूख गया तो सूख गया मधुवन की छाती को देखो सूखी कितनी इसकी कलियाँ मुर्झाई कितनी वल्लरियाँ जो मुर्झाई फिर कहाँ खिली पर बोलो सूखे फूलों पर कब मधुवन शोर मचाता है जो बीत गई सो बात गई   जीवन में मधु का प्याला था तुमने तन मन दे डाला था वह टूट गया तो टूट गया मदिरालय का आँगन देखो कितने प्याले हिल जाते हैं गिर मिट्टी में मिल जाते हैं जो गिरते हैं कब उठतें हैं पर बोलो टूटे प्यालों पर कब मदिरालय पछताता है जो बीत गई सो बात गई   मृदु मिटटी के हैं बने हुए मधु घट फूटा ही करते हैं लघु जीवन लेकर आए हैं प्याले टूटा ही करते है...

शब्द कलश सेमिस्टर २ नोट्स

शब्द कलश -सेमिस्टर 2 B.A.I Opt Hindi महाजनी सभ्यता- प्रेमचंद      महाजनी सभ्यता प्रेमचंद का लिखा एक बहुचर्चित विचारात्मक  निबंध साहित्य हे। पहले यह निबंध महाजनी तहजीब नामक शीर्षक से उर्दू मासिका में प्रसिद्ध हुआ था। इस निबंध के द्वारा प्रेमचंद ने हमारे देश में महाजनी सभ्यता की स्पष्ट रूप से निंदा की है ।महाजनी सभ्यता से जागीरदारी सभ्यता तथा साम्राज्यवाद तथा मार्क्सवाद का प्रेमचंद जी ने गुणगान किया है। प्रेमचंद लिखते है  जागीरदार प्रजा का  पालन करता था और न्याय शील भी होता था उसमें दोष के साथ गुण भी थे।     महाजनी सभ्यता में सारे कामों की गरज सिर्फ पैसा होती है। महाजनों पूंजी पतियों को ज्यादा से ज्यादा नशा हो इसी दृष्टि से आज दुनिया में महाजनों का राज्य दिखाई देता है और धनी लोगों ने मानव भाव को पूर्ण रूप से अपने अधीन कर लिया है। कुलीनता शराफत गुण कमाल की कसौटी पर पैसा ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। जिसके पास पैसा है वह देवता है। साहित्य संगीत और कला धन की देहरी पर माथा टेकने वालों में ही है। डॉक्टर और हकीम बिना इसलिए बात नहीं करते वकील और बैरिस्ट...